|| मुसाफिर ||

चले थे नई मंजिलें ढूँढने, पूछते, रास्ते कुछ जाने, कुछ अंजाने, ढूँढने तन्हाईओं को, जहां रुक जाये हम और थम जाये समय, लेकिन रास्ते हमेशा ले जाते हैं, लोगों में और कुछ इंसानों में, उम्मीदों में और कुछ मायूसिओं में, कभी मुसाफिर मोहब्बतों में,तो कभी अपने फ़रेबो मे, कभी शर्म से झुकती नज़रों में, हया…

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Extreme living; Cheese Rolling Festival

This weekend I probably did the craziest thing in my whole life so far & survived it. Consider rolling down an almost concave hill face inclined more than 1:1 for 200 yards from the top and ending at the bottom in any position, but on two feet. That exactly is what I and almost 75…

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