एक अधूरा सफ़र

सितारों को आँखों में महफूज़ रख लो, बड़ी दूर तक रात ही रात होगी, मुसाफिर हो तुम भी, मुसाफिर हैं हम भी, इस्सी मोड़ पे फिर मुलाकात होगी। येह पंक्तियाँ मेरी नहीं हैं, लेकिन इस सफ़र के लिये मैंने उधार लिये हैं, सिर्फ इस सफ़र के लिए ।

Rate this:

प्रतिबिंब

अक्सर, कवितायें सोची नहीं जाती, योजित नहीं होती, सोची समझी नहीं होती, वेह तो किसी मद्यजन्य के होटों पर मधु की तरह हैं, खुद से ही बेखबर और बाकियों से बेपरवाह बेहिती है। येह ऐसे ही कुछ संवाद हैं जिन्हें में एक जगह प्रस्तुत कर रहा हूँ, आशा हैं आप सब अपने रोज़ मर्रा के कम से…

Rate this:

|| मुसाफिर ||

चले थे नई मंजिलें ढूँढने, पूछते, रास्ते कुछ जाने, कुछ अंजाने, ढूँढने तन्हाईओं को, जहां रुक जाये हम और थम जाये समय, लेकिन रास्ते हमेशा ले जाते हैं, लोगों में और कुछ इंसानों में, उम्मीदों में और कुछ मायूसिओं में, कभी मुसाफिर मोहब्बतों में,तो कभी अपने फ़रेबो मे, कभी शर्म से झुकती नज़रों में, हया…

Rate this: